Tuesday, September 21, 2010
des
देश को डराया ज रहा हैं कि एक बार फिर अयोध्या का निर्णय देश कि एकता को तोड़ने कि कोशिश कर सकता हैं -----मेरा तो मन्ना हैं कि -------
सुबो के न हो जगड़े न मजहब पर सियासत हो
ये पूरा मुल्क हैं अपना यही जज्बा जगाना हैं |
जख्मो को कुरेदोगे तो हासिल कुछ नही होगा
मुह्ह्बस्त में ही जीना हैं मुहब्बत को ही गाना हैं |
राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद
कोमी एकता हो आबाद वर्ना होंगे हम बर्बाद
सुबो के न हो जगड़े न मजहब पर सियासत हो
ये पूरा मुल्क हैं अपना यही जज्बा जगाना हैं |
जख्मो को कुरेदोगे तो हासिल कुछ नही होगा
मुह्ह्बस्त में ही जीना हैं मुहब्बत को ही गाना हैं |
राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद
कोमी एकता हो आबाद वर्ना होंगे हम बर्बाद
Tuesday, May 11, 2010
सम्माननीय बंधु जी ,सादर वन्देमातरम |
आप सभी जानते हैं कि बाब भी देश में किसी तरह के बदलाव कि बात कि जाति हैं तो सबसे पहले हमारा ध्यान देश के योवन पर जाकर केन्द्रित होता हैं |भारत में एक वर्ग एसा हैं जो देश में सम्पुरण रूप से बदलाव कहते हैं जेसे शहीदेआजम भगत सिंह जी ने सम्पुरण स्वराज की बात कही थी| क्या देश को पूर्ण स्वराज मिला ? क्या आज का भारत शहीदों के सपनों का भारत हैं ? क्या शहीदों की आत्माए देश की निक्कमी व्यवसथा को चलरहे नेताओं को कभी माफ़ कर पायेगी ? में तो मान कर चलता हूँ कि---------------------
परवान चढ़ रहा हैं योवन आज मेरे देश का |
आएगा मेरे मुल्क में अब बदलाव आएगा ||
फेलाई हुई ये नफरतें बदलेगी मुहब्बत में |
देश वासियों में फिर भाई सद्भाव आएगा ||
कहीं नही हैं हिन्दू मुसल्मा सीख में कोई बेर |
हम सभी हैं बस भारतीय यह भाव आएगा ||
बह जायेगी कमजोरिया बुराइयाँ अपने देश की|
जल्द मेरे मुल्क में एक एसा बहाव आएगा ||
सता की आँखों में न हो भेद हिन्दू मुसल्मा में |
सता की आँख में एसा सद्भाव आयेगा ||
न टूटेंगे कभी मंदिर न ढहेगी फिर कहीं मस्जिदे |
देश में समझ का एसा रख रखाव जरुर आएगा ||
जात हिंद
आप सभी जानते हैं कि बाब भी देश में किसी तरह के बदलाव कि बात कि जाति हैं तो सबसे पहले हमारा ध्यान देश के योवन पर जाकर केन्द्रित होता हैं |भारत में एक वर्ग एसा हैं जो देश में सम्पुरण रूप से बदलाव कहते हैं जेसे शहीदेआजम भगत सिंह जी ने सम्पुरण स्वराज की बात कही थी| क्या देश को पूर्ण स्वराज मिला ? क्या आज का भारत शहीदों के सपनों का भारत हैं ? क्या शहीदों की आत्माए देश की निक्कमी व्यवसथा को चलरहे नेताओं को कभी माफ़ कर पायेगी ? में तो मान कर चलता हूँ कि---------------------
परवान चढ़ रहा हैं योवन आज मेरे देश का |
आएगा मेरे मुल्क में अब बदलाव आएगा ||
फेलाई हुई ये नफरतें बदलेगी मुहब्बत में |
देश वासियों में फिर भाई सद्भाव आएगा ||
कहीं नही हैं हिन्दू मुसल्मा सीख में कोई बेर |
हम सभी हैं बस भारतीय यह भाव आएगा ||
बह जायेगी कमजोरिया बुराइयाँ अपने देश की|
जल्द मेरे मुल्क में एक एसा बहाव आएगा ||
सता की आँखों में न हो भेद हिन्दू मुसल्मा में |
सता की आँख में एसा सद्भाव आयेगा ||
न टूटेंगे कभी मंदिर न ढहेगी फिर कहीं मस्जिदे |
देश में समझ का एसा रख रखाव जरुर आएगा ||
जात हिंद
Thursday, May 6, 2010
क्रूरतम कसाब को एक बार नही १५० बार फासी की सजा होनी चाहिए -----डॉ प्रेमदान भारतीय
आयांक्वाद एक अराष्ट्रीय कुकृत्य हैं भारत की सहिष्ण संकृति को कमजोर माननेवाली आतंकवादी सोच को करार जटका लगा हैं |कसब के साथ अफजल गुरु को भी फांसी पर लटका देना चाहिए |देश के नागरिकों को पागलों की तरह गोलियों से भूनने वाले कसाब जैसे आतंकवादियों को किसी तरह की दया की भीख देने का अधिकार ही नही होना चाहिए |अफजल भी इसी तरह बचाहुआ हैं अब कसब भी कलको यदि राष्ट्रपति महोदय जी से दया की भीख मांगे तो न जाने कितना समय और निकल जायेगा |
आयांक्वाद एक अराष्ट्रीय कुकृत्य हैं भारत की सहिष्ण संकृति को कमजोर माननेवाली आतंकवादी सोच को करार जटका लगा हैं |कसब के साथ अफजल गुरु को भी फांसी पर लटका देना चाहिए |देश के नागरिकों को पागलों की तरह गोलियों से भूनने वाले कसाब जैसे आतंकवादियों को किसी तरह की दया की भीख देने का अधिकार ही नही होना चाहिए |अफजल भी इसी तरह बचाहुआ हैं अब कसब भी कलको यदि राष्ट्रपति महोदय जी से दया की भीख मांगे तो न जाने कितना समय और निकल जायेगा |
Thursday, April 8, 2010
सम्माननीय बंधुओं ,सादर वन्देमातरम |
भारतीय लोकतंत्र में कुछ गलत लोगों के प्रवेश करने के कारण कुछ विकार आया गये हैं जिसे दूर करने के लिए यह जरूरी है की नये सिरे से ,नए तरीके से नए लगों के साथ नई सोच को लेकर भारत मैं काम करने की जरूरत को आज जब सारा देश म्ह्सुश कर रहा हैं ऐसे में एक भारतीय साधू ने ठीक वेसे ही अपनी कमर कसली हैं जेसे स्वामी दयानंद स्वर्स्व्सती ने अज्ञान के खिलाफ ,कुरीतियों के खिलाफ अंधविश्वासों के खिलाफ जो जाग्रति अभियान चलाया था ठीक उसी अंदाज में स्वामी रामदेव जी ने हमारी मातृभूमि के उद्दार का सैट संकल्प लिय हैं मुझे इस कार्य में इसलिए जुड़ना अच्छा लगता हैं क्यों की मुझे एसा लगता हैं की जेसे जो जो मैने २५ वर्षों में देश के उत्थान के बारे में सोचा था अब पूरा होने का वक्त आया गया हैं --------------
गजल
सत्ता के बदलने से तो अब तक मात्र चहरेबदलें हैं
ववस्था के बदलने से ही मुल्क की काया पलटती हैं
व्वयस्था का लक्ष्य हो सिर्फ राष्ट्र का उत्थान
कोई कसले जो कमर देश की वयवस्था बदलती हैं
प्रजा खुद चाहती हैं देश निक्कमें नाबूत हो जाएँ
अब तो करना है आव्हान प्रजा मोका तरसती हैं
उठा है एक सन्यासी लिए चेतन्य शाश्वत का
नत्मश्तक होने को व्यवश्था अब मचलती हैं
भारतीय लोकतंत्र में कुछ गलत लोगों के प्रवेश करने के कारण कुछ विकार आया गये हैं जिसे दूर करने के लिए यह जरूरी है की नये सिरे से ,नए तरीके से नए लगों के साथ नई सोच को लेकर भारत मैं काम करने की जरूरत को आज जब सारा देश म्ह्सुश कर रहा हैं ऐसे में एक भारतीय साधू ने ठीक वेसे ही अपनी कमर कसली हैं जेसे स्वामी दयानंद स्वर्स्व्सती ने अज्ञान के खिलाफ ,कुरीतियों के खिलाफ अंधविश्वासों के खिलाफ जो जाग्रति अभियान चलाया था ठीक उसी अंदाज में स्वामी रामदेव जी ने हमारी मातृभूमि के उद्दार का सैट संकल्प लिय हैं मुझे इस कार्य में इसलिए जुड़ना अच्छा लगता हैं क्यों की मुझे एसा लगता हैं की जेसे जो जो मैने २५ वर्षों में देश के उत्थान के बारे में सोचा था अब पूरा होने का वक्त आया गया हैं --------------
गजल
सत्ता के बदलने से तो अब तक मात्र चहरेबदलें हैं
ववस्था के बदलने से ही मुल्क की काया पलटती हैं
व्वयस्था का लक्ष्य हो सिर्फ राष्ट्र का उत्थान
कोई कसले जो कमर देश की वयवस्था बदलती हैं
प्रजा खुद चाहती हैं देश निक्कमें नाबूत हो जाएँ
अब तो करना है आव्हान प्रजा मोका तरसती हैं
उठा है एक सन्यासी लिए चेतन्य शाश्वत का
नत्मश्तक होने को व्यवश्था अब मचलती हैं
Tuesday, April 6, 2010
सम्माननीय बंधुओं ,सादर वन्देमातरम |
भारतीय लोकतंत्र के लिए आजादी के बाद का सबसे कमजोर और गलतियों भरा दिनथा ६ अप्रेल का दिन नक्सलवाद को अंकुश मैं लाने के लिए केंद्र सरकार के प्रयत्न तो जारी ही है बावजूद इसके हम नक्षलवादियों को मुह तोड़ जवाब क्यों नही दे पा रहें हैं ? क्या अब भारतीय सेना को लोकल उग्रवाद से रूबरू नही होना चाहिए |
दतावादा मैं शहीद हुये७६ भारतीय जवानो की शहीदी व्यर्थ ना जाये इसका हर भारतीय को अपनेदेश में फ़ैल रहे इन राष्ट्रद्रोही ताकतों वाले लोगो को सरकार के साथ मिलकर हमें प्रयत्न करने चाहिय|
७६ जवानों कीशहीदी कोसलाम देतेहुये ---श्रदांजली |
जय राष्ट्रवाद
भारतीय लोकतंत्र के लिए आजादी के बाद का सबसे कमजोर और गलतियों भरा दिनथा ६ अप्रेल का दिन नक्सलवाद को अंकुश मैं लाने के लिए केंद्र सरकार के प्रयत्न तो जारी ही है बावजूद इसके हम नक्षलवादियों को मुह तोड़ जवाब क्यों नही दे पा रहें हैं ? क्या अब भारतीय सेना को लोकल उग्रवाद से रूबरू नही होना चाहिए |
दतावादा मैं शहीद हुये७६ भारतीय जवानो की शहीदी व्यर्थ ना जाये इसका हर भारतीय को अपनेदेश में फ़ैल रहे इन राष्ट्रद्रोही ताकतों वाले लोगो को सरकार के साथ मिलकर हमें प्रयत्न करने चाहिय|
७६ जवानों कीशहीदी कोसलाम देतेहुये ---श्रदांजली |
जय राष्ट्रवाद
Wednesday, March 31, 2010
सम्मानीय बंधुओं ,
्वंदेमात्र्म |
भारतीय समाज में चारों वर्णों से अलग एक वर्नातित देवजाति हैं चारण |आप जानते ही हैं की मुझे भी इस जाति में जन्म लेने का गोरव प्राप्त हुआ हैं जिस जाति ने सत्य को ही अपना हथियार बनाया और उसी सत्य के आधार पर इस जाति ने सम्राटों एवं सत्ता को खुली चुनोतियाँ भी दी |मैने भी अपनी देव जाति की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम सं १९८५ से ही कार्य शुरू कर दीया था ,आज पचीस वर्ष हो गये हैं में राष्ट्रीय एकता ,सांप्रदायिक सद्भाव ,भाईचारे ,कोमी एकता एवं समन्वयात्मक राजनीति को बढ़ावा देने का ही काम किया आज मुझे लगने लगा हैं की यदी में किसी अन्य जाति में जन्मा होता तो मैने कब का अपना लक्ष्य बदल दीया होता परन्तु मेरे रगों में दोड्नेवाले चारण ततव ने मुझे विचलित नही होने दीया एसा नहीं हैं की मुझे भी लालच नही दिए गये परन्तु भीतर तक धन के प्रति कोई गहरी लालसा थी ही नहीं इसीलिए में आज भी उसी लगाव से देश की एकता के लिए क्रम रत हूँ |
एसा चारण तत्वहैं क्या ? जब मैने गहराई से खुद केभीतर बहनेवाले विचारों को जाना तो मुझे मेरे प्रशन का जवाब मिल गया और में इस निष्कर्ष पर पहुचा की -------------------
चारण की चेतना को न कभी ललकारा मुगलों ने ,
अंग्रेजों को बारहठ केशरी सिंह ने ललकारा था |
हम चारण हैं हमारी चेतना का ैं न हैं कोई सानी ,
आजादी के सूरज को प्रताप सिंह ने निखारा था |
हमने ठान ली जब भी सत्ता के मोड़ डाले रुख ,
चारण चले थे अकेले ही देश ने जब पुकारा था |
हममें आज भी है कुव्वत जमाने को बदलने की ,
थी न सत्ता की समज जिनम हमने सवार था |
दुरसा आढ़ा बन्किदास गाडन केसोदास थे जींदा ,
केशरी सिंह अखा लखा जी वाह क्या नजर था \
कपूतों का न यश गाया किया वीरों को अम्र हमने ,
यूँ ही जागीरी नही मिली थी झूठों को नकारा था |
सत्ता को सच कहने का था शिर्फ़ होसला चारण में ,
प्रजा की वकालात करता प्रजा चारण सहारा था |
्वंदेमात्र्म |
भारतीय समाज में चारों वर्णों से अलग एक वर्नातित देवजाति हैं चारण |आप जानते ही हैं की मुझे भी इस जाति में जन्म लेने का गोरव प्राप्त हुआ हैं जिस जाति ने सत्य को ही अपना हथियार बनाया और उसी सत्य के आधार पर इस जाति ने सम्राटों एवं सत्ता को खुली चुनोतियाँ भी दी |मैने भी अपनी देव जाति की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम सं १९८५ से ही कार्य शुरू कर दीया था ,आज पचीस वर्ष हो गये हैं में राष्ट्रीय एकता ,सांप्रदायिक सद्भाव ,भाईचारे ,कोमी एकता एवं समन्वयात्मक राजनीति को बढ़ावा देने का ही काम किया आज मुझे लगने लगा हैं की यदी में किसी अन्य जाति में जन्मा होता तो मैने कब का अपना लक्ष्य बदल दीया होता परन्तु मेरे रगों में दोड्नेवाले चारण ततव ने मुझे विचलित नही होने दीया एसा नहीं हैं की मुझे भी लालच नही दिए गये परन्तु भीतर तक धन के प्रति कोई गहरी लालसा थी ही नहीं इसीलिए में आज भी उसी लगाव से देश की एकता के लिए क्रम रत हूँ |
एसा चारण तत्वहैं क्या ? जब मैने गहराई से खुद केभीतर बहनेवाले विचारों को जाना तो मुझे मेरे प्रशन का जवाब मिल गया और में इस निष्कर्ष पर पहुचा की -------------------
चारण की चेतना को न कभी ललकारा मुगलों ने ,
अंग्रेजों को बारहठ केशरी सिंह ने ललकारा था |
हम चारण हैं हमारी चेतना का ैं न हैं कोई सानी ,
आजादी के सूरज को प्रताप सिंह ने निखारा था |
हमने ठान ली जब भी सत्ता के मोड़ डाले रुख ,
चारण चले थे अकेले ही देश ने जब पुकारा था |
हममें आज भी है कुव्वत जमाने को बदलने की ,
थी न सत्ता की समज जिनम हमने सवार था |
दुरसा आढ़ा बन्किदास गाडन केसोदास थे जींदा ,
केशरी सिंह अखा लखा जी वाह क्या नजर था \
कपूतों का न यश गाया किया वीरों को अम्र हमने ,
यूँ ही जागीरी नही मिली थी झूठों को नकारा था |
सत्ता को सच कहने का था शिर्फ़ होसला चारण में ,
प्रजा की वकालात करता प्रजा चारण सहारा था |
Sunday, March 21, 2010
सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
योग गुरु स्वामी रामदेव जी ने भारतीय लोकतंत्र कि कार्य प्रणाली से दुखी होकर के भारतीय व्यवसथा में परिवर्तन का बिगुल फूंक दीया है |एक संत ने भारतीय व्यवसथा में बदलाव के लिए योग के माध्यम से जो क्रांति लाई वह तो अतुलनीय हैं ही परन्तु अब बाबा जी ने भारतीय व्यवस्थाओं के दलालों को नेस्ताबुत करने कि ठान ली हैं |भारतीय प्रजा में विश्वाश का संचार हो रहा हैं |अभी तो मात्र स्वामी जी ने राजनीति में आने कि घोषणा कि हैं इतने में ही लोगो कि नींद हराम होने लगी हैं |अभी तो तीन साल पड़ें हैं लोक सभा के चुनावों में आज से ही भ्रश्ताच्रियाओं कि हालत पतली हो रही हैं |वाह रे संत तेरी वाणी का प्रभाव |वाह रे संत रर देश प्रेम |आज जहाँ दुसरे संत अपनी मुक्ति के लिए क्रमरहित होकर ब्रह्म कि चर्चाओं में लगें हैं वहीं एक संत राष्ट्र कि मुक्ति के लए अपना जीवन दांव पर लगा रहा हैं |
मैं तो स्वामी जी के देश प्रेम का कायल हूँ |एसा लगता हैं जेसे मेरा ही सोचाहुआ कार्य पूरा होने जा रहा हैं \मैं तो इस्वर का आभारी हनु कि मुझे भारत मैं सेवा को सुअवसर दीया |
जय हिंद
सादर वन्देमातरम |
योग गुरु स्वामी रामदेव जी ने भारतीय लोकतंत्र कि कार्य प्रणाली से दुखी होकर के भारतीय व्यवसथा में परिवर्तन का बिगुल फूंक दीया है |एक संत ने भारतीय व्यवसथा में बदलाव के लिए योग के माध्यम से जो क्रांति लाई वह तो अतुलनीय हैं ही परन्तु अब बाबा जी ने भारतीय व्यवस्थाओं के दलालों को नेस्ताबुत करने कि ठान ली हैं |भारतीय प्रजा में विश्वाश का संचार हो रहा हैं |अभी तो मात्र स्वामी जी ने राजनीति में आने कि घोषणा कि हैं इतने में ही लोगो कि नींद हराम होने लगी हैं |अभी तो तीन साल पड़ें हैं लोक सभा के चुनावों में आज से ही भ्रश्ताच्रियाओं कि हालत पतली हो रही हैं |वाह रे संत तेरी वाणी का प्रभाव |वाह रे संत रर देश प्रेम |आज जहाँ दुसरे संत अपनी मुक्ति के लिए क्रमरहित होकर ब्रह्म कि चर्चाओं में लगें हैं वहीं एक संत राष्ट्र कि मुक्ति के लए अपना जीवन दांव पर लगा रहा हैं |
मैं तो स्वामी जी के देश प्रेम का कायल हूँ |एसा लगता हैं जेसे मेरा ही सोचाहुआ कार्य पूरा होने जा रहा हैं \मैं तो इस्वर का आभारी हनु कि मुझे भारत मैं सेवा को सुअवसर दीया |
जय हिंद
Monday, March 15, 2010
सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
जब भी में किसी कवी सम्मेलन में अपनी रचनाये पढ़ कर अन्यों को सुनकर घर आता हूँ तो मुझे इस बात का दुःख होता हैं कि साहित्य के नाम पर कुछ मसखरे अपनी फूहड़ता को कितनी शालीनता के साथ प्रस्तुत करके साहित्य को निर्ममता से हलाल कर देते हैं |अपने विचारों को कविता के नाम पर श्रोताओं के जहनपर थोप देतें हैं |ऐसे लोगो के लिए मैने लिखा हैं ---------------
मसखरी कविता में फर्क नही जनता ,
सठियाये समाज कि पहचान यही हैं |
फूहड़ता नोक जोंक साहित्य नही होता ,
शब्दों के दलालों कि शान यही हैं
सादर वन्देमातरम |
जब भी में किसी कवी सम्मेलन में अपनी रचनाये पढ़ कर अन्यों को सुनकर घर आता हूँ तो मुझे इस बात का दुःख होता हैं कि साहित्य के नाम पर कुछ मसखरे अपनी फूहड़ता को कितनी शालीनता के साथ प्रस्तुत करके साहित्य को निर्ममता से हलाल कर देते हैं |अपने विचारों को कविता के नाम पर श्रोताओं के जहनपर थोप देतें हैं |ऐसे लोगो के लिए मैने लिखा हैं ---------------
मसखरी कविता में फर्क नही जनता ,
सठियाये समाज कि पहचान यही हैं |
फूहड़ता नोक जोंक साहित्य नही होता ,
शब्दों के दलालों कि शान यही हैं
Tuesday, March 9, 2010
1 मैं मेहनत की खाता हूँ न किसीका दिल दुखाता हूँ ,
नहीं मैं संत सन्यासी मैं देश भक्त कहाता हूँ |
नही आश्रम मेरा कोई न अनुयाइयों का झमेला हैं ,
देश की एकता चाहूँ सोयों को मैं जगाता हूँ |
2 नरक गामी हैं जिनके कर्म नमन उनको नही करता ,
मुझे जो अच्छा लगता हैं मैं उसीका साथ देता हूँ |
हो चाहे वो संत सन्यासी ,एकता जो मुल्क में चाहे
बहुत परख के मैं हाथोंमें उनके हाथ देताहूँ |
नहीं मैं संत सन्यासी मैं देश भक्त कहाता हूँ |
नही आश्रम मेरा कोई न अनुयाइयों का झमेला हैं ,
देश की एकता चाहूँ सोयों को मैं जगाता हूँ |
2 नरक गामी हैं जिनके कर्म नमन उनको नही करता ,
मुझे जो अच्छा लगता हैं मैं उसीका साथ देता हूँ |
हो चाहे वो संत सन्यासी ,एकता जो मुल्क में चाहे
बहुत परख के मैं हाथोंमें उनके हाथ देताहूँ |
प्यारे भारतप्रेमियों ,सादर वन्देमातरम |
स्वामी रामदेव जी ने जब से भारत स्वाभिमान के लिए कार्य शुरू किया हैं तब से लेकर अब तक देश की राजनीति में जेसे उबाल आया गया हैं मैने तो एक ही बार स्वामी जी के दर्शन से परिचित हुआ मैने माना कि यदी यह कार्य एक संत कर सकता हैं तो एक युवा क्यों नही कर सकता ? स्वामी राम देव जी जेसे और संत भी यदी भारत मान का क्रंदन सुनले तो इस देश में नई व्यवसथा आकर ले सकती हैं |
कमर जब संत कसतें हैं प्रक्रति साथ देती हैं
संत जब हुंकार करते हैं सत्ता थर थरातीहैं |
देख कर देश कि हालत करवट शाश्त्र बदलेगें
संतों कि करनी ही हममें देश भक्ति जगातीहैं \
देख नेताओं कि करतूत देश हेरान हैं होता
इनके कर्मों पे भारत माँ आसूँ बहाती हैं |
युवाओं के योवन कि जरूरत हैं देश को ज्यादा
युवा सिर्फ जब अपनी सोचे हैं बात यही सताती हैं
जवानों में होती हैं जान राष्ट्र उद्धार कर पायें
देख फांसी के फंदे को जवानी मुस्कुराती हैं |
पीड परिवर्तन को लेकर चला हैं एक सन्यासी
व्यवस्था पूरी बदलेंगें इससे सत्ता लड़खड़ाती हैं |
युवाओं फिर तुम्हारे यौवन कि कसोटी होनी हैं ,
व्यवस्था बदलने में जवानी फिरलहलहाती हैं
स्वामी रामदेव जी ने जब से भारत स्वाभिमान के लिए कार्य शुरू किया हैं तब से लेकर अब तक देश की राजनीति में जेसे उबाल आया गया हैं मैने तो एक ही बार स्वामी जी के दर्शन से परिचित हुआ मैने माना कि यदी यह कार्य एक संत कर सकता हैं तो एक युवा क्यों नही कर सकता ? स्वामी राम देव जी जेसे और संत भी यदी भारत मान का क्रंदन सुनले तो इस देश में नई व्यवसथा आकर ले सकती हैं |
कमर जब संत कसतें हैं प्रक्रति साथ देती हैं
संत जब हुंकार करते हैं सत्ता थर थरातीहैं |
देख कर देश कि हालत करवट शाश्त्र बदलेगें
संतों कि करनी ही हममें देश भक्ति जगातीहैं \
देख नेताओं कि करतूत देश हेरान हैं होता
इनके कर्मों पे भारत माँ आसूँ बहाती हैं |
युवाओं के योवन कि जरूरत हैं देश को ज्यादा
युवा सिर्फ जब अपनी सोचे हैं बात यही सताती हैं
जवानों में होती हैं जान राष्ट्र उद्धार कर पायें
देख फांसी के फंदे को जवानी मुस्कुराती हैं |
पीड परिवर्तन को लेकर चला हैं एक सन्यासी
व्यवस्था पूरी बदलेंगें इससे सत्ता लड़खड़ाती हैं |
युवाओं फिर तुम्हारे यौवन कि कसोटी होनी हैं ,
व्यवस्था बदलने में जवानी फिरलहलहाती हैं
मेरे अपने आत्मीय बंधुओं ,आप के भीतर बेठे उस परम तत्व को प्रणाम करता हूँ जो प्रतिपल हमारे ह्रदय मेंधड़कन बनकर अपने होने का अहसास करता हैं |
आप तो जानते ही हैं की परमात्मा ने मुझे जो जिम्मेदारी सोपी हैं उसे में अपने सामर्यथ्य के अनुसार निभाने का प्रयत्न करता हूँ मैं नही जनता कि मेरे कर्मों से इस देश की युवा पीड़ी में कितनी देश भक्ति का में संचार कर पाऊंगा |इतना जरुर जनता हूँ किमेरे द्वारा जो भी काम देश सेवा के रूप में किया जा रहा हैं वह परमात्मा की ही इच्छा हैं में तो मात्र एक माध्यम हूँ \आज फिर इश्वर की कृपा से मैने नया लिखा हैं आप तक इसे पहुचाकर में अपने आप को धन्यता महसूस कर रहा हूँ ---1--संत के दर्शन से भाई बुरे कर्मों का होता नाश
संत के साथ रहने से मोक्ष का भाव सुहाता हैं |
उसी को संत कहता हूँ जिसने ज्ञान हैं पाया ,
जिसका स्मरण करने से इश्वर का नाम आता हैं |
2 सन्त का जीवन त्यागमय दर्शन मोक्ष्मय जिसका
नही जिसको कोई मोह सच्चा संत कहाता हैं
नही खोले जो आश्रम फसे जो ना विवादों में
एसा संत सदियों में कोई विरला ही आता हैं |
३ आश्रम खोल कर भोगी नया संसार रचातें हैं
धर्म के नाम पर कीड़े अधर्म के गीत गातें हैं |
यहाँ कोई नही जो रोकले ऐसे शेतानो को
ऐसे शेतान मेरे देश में बड़े संत कहाते हैं |
आप तो जानते ही हैं की परमात्मा ने मुझे जो जिम्मेदारी सोपी हैं उसे में अपने सामर्यथ्य के अनुसार निभाने का प्रयत्न करता हूँ मैं नही जनता कि मेरे कर्मों से इस देश की युवा पीड़ी में कितनी देश भक्ति का में संचार कर पाऊंगा |इतना जरुर जनता हूँ किमेरे द्वारा जो भी काम देश सेवा के रूप में किया जा रहा हैं वह परमात्मा की ही इच्छा हैं में तो मात्र एक माध्यम हूँ \आज फिर इश्वर की कृपा से मैने नया लिखा हैं आप तक इसे पहुचाकर में अपने आप को धन्यता महसूस कर रहा हूँ ---1--संत के दर्शन से भाई बुरे कर्मों का होता नाश
संत के साथ रहने से मोक्ष का भाव सुहाता हैं |
उसी को संत कहता हूँ जिसने ज्ञान हैं पाया ,
जिसका स्मरण करने से इश्वर का नाम आता हैं |
2 सन्त का जीवन त्यागमय दर्शन मोक्ष्मय जिसका
नही जिसको कोई मोह सच्चा संत कहाता हैं
नही खोले जो आश्रम फसे जो ना विवादों में
एसा संत सदियों में कोई विरला ही आता हैं |
३ आश्रम खोल कर भोगी नया संसार रचातें हैं
धर्म के नाम पर कीड़े अधर्म के गीत गातें हैं |
यहाँ कोई नही जो रोकले ऐसे शेतानो को
ऐसे शेतान मेरे देश में बड़े संत कहाते हैं |
Monday, March 8, 2010
Sunday, March 7, 2010
मेरे अपने आत्मीय जनों ,आपके भीतर बेठेहुये परमात्मा को में प्रणाम करता हूँ |क्या आप को कभी एसा लगा की हमारे देश के पुण्य ख़त्म हो रहें हैं /\हमारे पूर्वजों ने जो कुछ भी अच्छा किया क्या हम आप उसे संभाल पा रहे हैं ?क्या आप को नही लगता हमारा समाज दिशा हिन् होता जा रहा हैं ? कहने को हमारे पास शंकराचार्य भी हैं ,संतों की तो जैसे बाढ़ ही आगयी हैं बावजूद इसके हमारा नेतिक पतन का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा हैं आप क्या सोचतें हैं ?यह एकाएक हो गया हैं नहीं ,यह सबधीरे धीरे हो रहा था तब आप हम श्रदा के नाम पर अन्धविश्वाश करने में लगे हुए थे ?हमरा समाज कब पतन की रह पर चल पड़ा हम समजे इससे पहले तो हम कंगाल हो गये ?
आप स्वयम जानते हैं की आज संतों की कथाये भी व्यवसाय का शुद्ध रूप धारण कर चुकी हैं फिर भी हम आप मुक्ति के लिये इन शब्दों के करोभारियों के पास जाकर अपनी मुक्ति की ,मोक्ष की उम्मीद क्रेत्न हैं क्या यह अपने आप को हम धोका नही दे रहें हैं ?में यह नही कहता के भारत के सभी कथावाचक व्यवसायी हैं परन्तु ज्यादातर आर्थ को ही तवज्जो देते हैं |वेसे भी भारत तो इन राजनेताओं की करतूतों से बहुत ही शर्मिंदा हैं उस पर संतों के सेक्स सम्बन्धी कांड सुनकर भरी आघात लगता हैं |
मेरा निवेदन हैं भारतीय साधू समाज से की वह ऐसे पाखंडी ,ढोंगी बाबाओं पर अंकुश लगायें |हमारी श्रदा के साथ खिलवाड़ करना कितना सरल हो गया हैं ,कोई भी भारतीय प्रजा को अपने चंगुल में फांश लेता हैं को देश के कल्याण के नाम पर तो कोई धर्म के नाम पर आखिर यह सब कुछ कब तक चलेगा ?
आप स्वयम जानते हैं की आज संतों की कथाये भी व्यवसाय का शुद्ध रूप धारण कर चुकी हैं फिर भी हम आप मुक्ति के लिये इन शब्दों के करोभारियों के पास जाकर अपनी मुक्ति की ,मोक्ष की उम्मीद क्रेत्न हैं क्या यह अपने आप को हम धोका नही दे रहें हैं ?में यह नही कहता के भारत के सभी कथावाचक व्यवसायी हैं परन्तु ज्यादातर आर्थ को ही तवज्जो देते हैं |वेसे भी भारत तो इन राजनेताओं की करतूतों से बहुत ही शर्मिंदा हैं उस पर संतों के सेक्स सम्बन्धी कांड सुनकर भरी आघात लगता हैं |
मेरा निवेदन हैं भारतीय साधू समाज से की वह ऐसे पाखंडी ,ढोंगी बाबाओं पर अंकुश लगायें |हमारी श्रदा के साथ खिलवाड़ करना कितना सरल हो गया हैं ,कोई भी भारतीय प्रजा को अपने चंगुल में फांश लेता हैं को देश के कल्याण के नाम पर तो कोई धर्म के नाम पर आखिर यह सब कुछ कब तक चलेगा ?
सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
भारतीय समाज में आदिकाल से संतों और महात्माओं केप्रति बड़ा ही सम्मान का भाव रहा हैं |शास्त्रों के मतानुसार यह कलियुग चलरहा हैं भारतीय समाज सतयुग की तरह ही आज भी संतो -महंतों में आस्था रखता हैंपरन्तु कलियुग के प्रभाव से संतों और महंतो में भी कुछ विकार आने स्वाभविक हैं |मेरी समज में यह नही आता की कोई व्यक्ति संतो के पास क्यों जाता हैं ?क्या संत हमे मुक्ति दिलाने का मात्र एक विकल्प हैं यह्मे विकल्पों का पता नही हैं | आज जो कुछ भी सादु, संत ,स्वामी कर रहें हैं इन सभी को समाज ने इतनीऊँचाइयाँ देदी है की हम लाचारी महसूस करने लगें हैं |सेक्स के मामले जितने भारतीय संतों के हमारे सामने आया रहें हैं यह वास्तव में समाज की ही दुर्दशा को प्रकट परता हैं | संत हमारे समाज का दर्पण हैं इसी से हम अंदाजा लगा सकतें हैं की हम केसे समाज में रहतें हैं |धर्म के नाम पर आज क्या नही चलता ?इतना कुछ होने के बावजूद हमारे समाज के कुछ लोग आज भी पंडालो के चक्कर काटें हैं,क्यों ?
कोई तो हो जो इन पर रोक लगाये
सादर वन्देमातरम |
भारतीय समाज में आदिकाल से संतों और महात्माओं केप्रति बड़ा ही सम्मान का भाव रहा हैं |शास्त्रों के मतानुसार यह कलियुग चलरहा हैं भारतीय समाज सतयुग की तरह ही आज भी संतो -महंतों में आस्था रखता हैंपरन्तु कलियुग के प्रभाव से संतों और महंतो में भी कुछ विकार आने स्वाभविक हैं |मेरी समज में यह नही आता की कोई व्यक्ति संतो के पास क्यों जाता हैं ?क्या संत हमे मुक्ति दिलाने का मात्र एक विकल्प हैं यह्मे विकल्पों का पता नही हैं | आज जो कुछ भी सादु, संत ,स्वामी कर रहें हैं इन सभी को समाज ने इतनीऊँचाइयाँ देदी है की हम लाचारी महसूस करने लगें हैं |सेक्स के मामले जितने भारतीय संतों के हमारे सामने आया रहें हैं यह वास्तव में समाज की ही दुर्दशा को प्रकट परता हैं | संत हमारे समाज का दर्पण हैं इसी से हम अंदाजा लगा सकतें हैं की हम केसे समाज में रहतें हैं |धर्म के नाम पर आज क्या नही चलता ?इतना कुछ होने के बावजूद हमारे समाज के कुछ लोग आज भी पंडालो के चक्कर काटें हैं,क्यों ?
कोई तो हो जो इन पर रोक लगाये
Tuesday, March 2, 2010
holi men kya kya jlayen
होली में क्या क्या जलाएं ?
हर तरफ देश में जब गद्दारों की भरमार हैं तब हमे अपने देश को बचाने के लिए अपनी मूर्च्छा अवश्था को होली में जलाना चाहिए |देश में जब आतंकवाद तांडव कर रहा हो तब हम भारतियों को होली में अपने निजी स्वार्थों को जलाकर देश को सुरक्षित रखना चाहिए | देश में जब नक्षलवाद पनप रहा हैं तब हमे होली में अकर्मण्यता को जलाकर नक्सलवाद से निपटने का भाव भरना चाहिए |प्रांतवाद की जब हर तरफ दुर्गंद फेल रही हैं तब होली में हम भारतियों को संकिरान्ता को जलाना चाहियें | भाषावाद पर जब राजनीती करके कुछ लोग हमारे भाई चारे को ,भारतीयता को नुक्सान पहुचा रहें हैं तब हमें होली में स्वयम की भावनाओं को होमना चाहिए |
जय हिंद
हर तरफ देश में जब गद्दारों की भरमार हैं तब हमे अपने देश को बचाने के लिए अपनी मूर्च्छा अवश्था को होली में जलाना चाहिए |देश में जब आतंकवाद तांडव कर रहा हो तब हम भारतियों को होली में अपने निजी स्वार्थों को जलाकर देश को सुरक्षित रखना चाहिए | देश में जब नक्षलवाद पनप रहा हैं तब हमे होली में अकर्मण्यता को जलाकर नक्सलवाद से निपटने का भाव भरना चाहिए |प्रांतवाद की जब हर तरफ दुर्गंद फेल रही हैं तब होली में हम भारतियों को संकिरान्ता को जलाना चाहियें | भाषावाद पर जब राजनीती करके कुछ लोग हमारे भाई चारे को ,भारतीयता को नुक्सान पहुचा रहें हैं तब हमें होली में स्वयम की भावनाओं को होमना चाहिए |
जय हिंद
Sunday, February 28, 2010
प्यारे भारत प्रिय बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
आज मैने अख़बार में पढ़ा स्वामी रामदेव जी आगामी लोक सभा में भारत स्वाभिमान के लोगो को चुनावों में उतारेंगें| पढ़ कर अच्छा लगा ,एक संत देश की वय्वश्था में शिष्टाचार लाने की कोशिश कर रहा हैं | भारतीय राजनीती में संतों के आगमन के उदाहरण से अब तक कोई ज्यादा परिवर्तन नजर नही आया |संत समर्पित लोगों का भी हश्र अच्छा नही देखा |भारतीय प्रजा का संतों का जो मोक्ष लक्षी रूप हैं उस छवि के आलावा किसी भी रूप में संत क्यों न आजाये उसे नकार दीया जाता हैं |
आज भारत के कण कण जहाँ भर्ष्टाचार दीमक की तरह फेल चूका हैं वहाँ भारत की राजनीती में परिवर्तन लाना ,ईमानदारी से चुनाव लड़ना ,भारतीय चुनावी आचार सहिंता का अक्षरस पालन करते हुए बिना नोट बांटें ,बिना शराब बांटें ,केसे कोई चुनाव जित सकेगा ? नेतिकता की बातें करना अति आसन हैं परन्तु नेतिकता को जीना बड़ा ही मुश्किल काम होता हैं \भारत ने नीतियाँ बुरी हैं यह कहनेवाले आधे भारतीय हैं परन्तु हल देनेवाले कम हैं |भारतीय मतदाता बहुत ही समजदार हैं अब उसे अपना लाभ देखना आया गया हैं |उसे न तो भाषण लुभा सकतें हैं ना ही संस्कारित बातें |
सादर वन्देमातरम |
आज मैने अख़बार में पढ़ा स्वामी रामदेव जी आगामी लोक सभा में भारत स्वाभिमान के लोगो को चुनावों में उतारेंगें| पढ़ कर अच्छा लगा ,एक संत देश की वय्वश्था में शिष्टाचार लाने की कोशिश कर रहा हैं | भारतीय राजनीती में संतों के आगमन के उदाहरण से अब तक कोई ज्यादा परिवर्तन नजर नही आया |संत समर्पित लोगों का भी हश्र अच्छा नही देखा |भारतीय प्रजा का संतों का जो मोक्ष लक्षी रूप हैं उस छवि के आलावा किसी भी रूप में संत क्यों न आजाये उसे नकार दीया जाता हैं |
आज भारत के कण कण जहाँ भर्ष्टाचार दीमक की तरह फेल चूका हैं वहाँ भारत की राजनीती में परिवर्तन लाना ,ईमानदारी से चुनाव लड़ना ,भारतीय चुनावी आचार सहिंता का अक्षरस पालन करते हुए बिना नोट बांटें ,बिना शराब बांटें ,केसे कोई चुनाव जित सकेगा ? नेतिकता की बातें करना अति आसन हैं परन्तु नेतिकता को जीना बड़ा ही मुश्किल काम होता हैं \भारत ने नीतियाँ बुरी हैं यह कहनेवाले आधे भारतीय हैं परन्तु हल देनेवाले कम हैं |भारतीय मतदाता बहुत ही समजदार हैं अब उसे अपना लाभ देखना आया गया हैं |उसे न तो भाषण लुभा सकतें हैं ना ही संस्कारित बातें |
Saturday, February 27, 2010
` प्यारे बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
भारत ने आजादी के तुरंत बाद लोकतंत्र को अपनाया ,मेरी द्रस्थी में यह एक एसी भूल थी जिसका खामियाजा हमारी नई पीड़ी भुगत रहीं हैं |लोकतंत्र को समजने वाली पजा को तैयार किये बिना ही हमारे नेताओं ने आनन -फानन में लोकतंत्र को अपना लिय अब जब हमें वय्वश्था में खामिया नजर आने लगी तो हमे लगने लगा की अब इस व्यवश्ता में परिवर्तन होना चाहिए परन्तु अब तो पानी सर के उपर से निकलने की तयारी में हैं -------
हमारे जींदा रहने से यहाँ पे कुछ नही होगा
व्यवस्था हो जींदा एसी हमें जहमत उठानी हैं
कोई लाखों में खेले हैं कोई फाकों में जिए हैं
करप्शन हो नही एसी जमुरियत फिर से लानी हैं
हमारे नेता अधिकारी घोटालों के शहंशाह हैं
मुल्क के गद्दारों की कभी तो सामत आनी हैं
जले नफरत के कीटाणु रियाया मुल्क को चाहे
उजाला हो मुहब्बत का सम्मा एसी जलानी हैं
मुल्क के पाप धुल जाये दुष्टों का दमन करने को
भगीरथ बनके हम सबको गंगा फिर से लानी हैं
हमारे स्वार्थ हम सब प ेकहीं हावी न हो जाये
चन्द्रगुप्त हो फीर तैयार ऐसे शिक्षा लानी है
हमारे होंसलों को कोई क्या खाख तोड़ेगा
बुजुर्गों का तजुबा है नोजवानो की जवानी है
तूफ़ान उठाने की यहाँ गद्दारों ने कसम ली है
हमे मिलके मेरे भाई मुल्क की नव बचानी है
नेताओं ने उगलकर ज़हर पैदा दूरियां कर दी
जली जो बस्तियां भाई मील के फिर बसानी है
वे गए गोरे हमारे मुल्क से मगर ऊलाद बाकी है
फूट डालेंगे जो भी हम में उनकी हस्ती मीटानी है
सादर वन्देमातरम |
भारत ने आजादी के तुरंत बाद लोकतंत्र को अपनाया ,मेरी द्रस्थी में यह एक एसी भूल थी जिसका खामियाजा हमारी नई पीड़ी भुगत रहीं हैं |लोकतंत्र को समजने वाली पजा को तैयार किये बिना ही हमारे नेताओं ने आनन -फानन में लोकतंत्र को अपना लिय अब जब हमें वय्वश्था में खामिया नजर आने लगी तो हमे लगने लगा की अब इस व्यवश्ता में परिवर्तन होना चाहिए परन्तु अब तो पानी सर के उपर से निकलने की तयारी में हैं -------
हमारे जींदा रहने से यहाँ पे कुछ नही होगा
व्यवस्था हो जींदा एसी हमें जहमत उठानी हैं
कोई लाखों में खेले हैं कोई फाकों में जिए हैं
करप्शन हो नही एसी जमुरियत फिर से लानी हैं
हमारे नेता अधिकारी घोटालों के शहंशाह हैं
मुल्क के गद्दारों की कभी तो सामत आनी हैं
जले नफरत के कीटाणु रियाया मुल्क को चाहे
उजाला हो मुहब्बत का सम्मा एसी जलानी हैं
मुल्क के पाप धुल जाये दुष्टों का दमन करने को
भगीरथ बनके हम सबको गंगा फिर से लानी हैं
हमारे स्वार्थ हम सब प ेकहीं हावी न हो जाये
चन्द्रगुप्त हो फीर तैयार ऐसे शिक्षा लानी है
हमारे होंसलों को कोई क्या खाख तोड़ेगा
बुजुर्गों का तजुबा है नोजवानो की जवानी है
तूफ़ान उठाने की यहाँ गद्दारों ने कसम ली है
हमे मिलके मेरे भाई मुल्क की नव बचानी है
नेताओं ने उगलकर ज़हर पैदा दूरियां कर दी
जली जो बस्तियां भाई मील के फिर बसानी है
वे गए गोरे हमारे मुल्क से मगर ऊलाद बाकी है
फूट डालेंगे जो भी हम में उनकी हस्ती मीटानी है
Thursday, February 25, 2010
सम्मानीय जागरूक भारतीय बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
भारतीय नेताओं ने मिलकर आज हमारे संसद में महगाई पर जोरदार बहस की |साधुवाद |
चलो अपने गोर्ख धन्दों ं से फुर्सत मिली तो महंगाई के मुद्दे पर देश के महान नेताओं ने अपनी महान चूपी तो तोड़ी |विपक्ष की नेता ने अच्छा भाषण दीया |मनमोहन जी को सलाह भी डी ,सोनिया जी को आगाह भी किया परन्तु इन नेताओं के चरों पर खिन भी मंहगाई की मार दिखाई नही डी ,कोई दर्द दिखाई नहीं दीया एसा लगा जेसे नेता अपनी भड़ास निकल रहें हैं | गरीब के पेट पर क्या गुजर रहीं हैं किसीको दिखाई नहीं देता |
कल संसद में भूख मिटने पे बहस हुई
सुबह एक गरीब ने दम तोडा महगाई के आगे
दुःख भरा जय हिंद
सादर वन्देमातरम |
भारतीय नेताओं ने मिलकर आज हमारे संसद में महगाई पर जोरदार बहस की |साधुवाद |
चलो अपने गोर्ख धन्दों ं से फुर्सत मिली तो महंगाई के मुद्दे पर देश के महान नेताओं ने अपनी महान चूपी तो तोड़ी |विपक्ष की नेता ने अच्छा भाषण दीया |मनमोहन जी को सलाह भी डी ,सोनिया जी को आगाह भी किया परन्तु इन नेताओं के चरों पर खिन भी मंहगाई की मार दिखाई नही डी ,कोई दर्द दिखाई नहीं दीया एसा लगा जेसे नेता अपनी भड़ास निकल रहें हैं | गरीब के पेट पर क्या गुजर रहीं हैं किसीको दिखाई नहीं देता |
कल संसद में भूख मिटने पे बहस हुई
सुबह एक गरीब ने दम तोडा महगाई के आगे
दुःख भरा जय हिंद
Wednesday, February 24, 2010
सम्माननीय भारत प्रेमी बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
भारतीय मानस पटल पर आजादी के पूर्व में जो भी निर्मम घटनाएँ हमारे देश के बंटवारे को लेकर घटी वे आज भी हमारे देश की आज की प्रजा को भी चेन से नही रहने देती | मेरा विचार है की जिस देश की नै पीढ़ी अपने हिंसक अतीत कोयाद रखती हैं वः वर्तमान में तरक्की के सुनहरे दिन नही देख पति इसलिए हर भारतीय को अपने देश को ही सर्वोपरी माननाचाहिए |आज यदि भारत की नै नस्ल तरक्की क्र रही हैं तो उसका सारा का सारा शरेय भारतीय समाज की विचारधारा को जाता हैं |हमारे देश के नोजवान नै उड़ने भर रहे हैं वहीं पकिश्थान की नै नस्ल हथियारों को ही अपना भविष्य मानने लगी हैं |
कोम की गद्दारी किसी भी मुल्क को तोड़ देती हैं
नफरत मुल्क के ख्वाबों का खून निचोड़ देती हैं
सादर वन्देमातरम |
भारतीय मानस पटल पर आजादी के पूर्व में जो भी निर्मम घटनाएँ हमारे देश के बंटवारे को लेकर घटी वे आज भी हमारे देश की आज की प्रजा को भी चेन से नही रहने देती | मेरा विचार है की जिस देश की नै पीढ़ी अपने हिंसक अतीत कोयाद रखती हैं वः वर्तमान में तरक्की के सुनहरे दिन नही देख पति इसलिए हर भारतीय को अपने देश को ही सर्वोपरी माननाचाहिए |आज यदि भारत की नै नस्ल तरक्की क्र रही हैं तो उसका सारा का सारा शरेय भारतीय समाज की विचारधारा को जाता हैं |हमारे देश के नोजवान नै उड़ने भर रहे हैं वहीं पकिश्थान की नै नस्ल हथियारों को ही अपना भविष्य मानने लगी हैं |
कोम की गद्दारी किसी भी मुल्क को तोड़ देती हैं
नफरत मुल्क के ख्वाबों का खून निचोड़ देती हैं
Tuesday, February 23, 2010
mahngai pr bhs
प्यारे भारत्वशियों ,
वन्देमातरम |
आज हमारे देश में महगाइ पर दोनों सदनों में गर्म बहस हुई |दोनों सदन स्तगित किये गये |महामहिम ने महंगाई पर जो बयान दीया उस्सेल्गता हैं किसान खुश हुयेहोंगें परन्तु सारा देश महंगाई की मार से त्राहि मामकर उठा हैं | बहस से कुछ भी हासिल नही हुआ |ऐसे महंगाई को अंकुश में लायाजयेगा? मेरी समज में न्हीआता की आखिर कोई जिम्मेवारी क्यों नही लेता की कुछ लाप्र्व्हियों से ,कुछ लोगों को फायदा पहुँचने के लिए आम आदमी पर कहर वर्शा हैं |
भारत के किशानो लाभ हुआ और जिनको नुकशान हुआ वे भारत के नागरिक नहीं हैं |उनकी किसीको कोई प्रवाह नही | धन्य हैं हमारी महान सरकार को जो एक को लाभ पहुचने के लिए आम नागरिक की कमर तोड़ कर भी श्रम म्ह्सुश नहीं करती ,शेखी ब्गारती हैं |
वन्देमातरम |
आज हमारे देश में महगाइ पर दोनों सदनों में गर्म बहस हुई |दोनों सदन स्तगित किये गये |महामहिम ने महंगाई पर जो बयान दीया उस्सेल्गता हैं किसान खुश हुयेहोंगें परन्तु सारा देश महंगाई की मार से त्राहि मामकर उठा हैं | बहस से कुछ भी हासिल नही हुआ |ऐसे महंगाई को अंकुश में लायाजयेगा? मेरी समज में न्हीआता की आखिर कोई जिम्मेवारी क्यों नही लेता की कुछ लाप्र्व्हियों से ,कुछ लोगों को फायदा पहुँचने के लिए आम आदमी पर कहर वर्शा हैं |
भारत के किशानो लाभ हुआ और जिनको नुकशान हुआ वे भारत के नागरिक नहीं हैं |उनकी किसीको कोई प्रवाह नही | धन्य हैं हमारी महान सरकार को जो एक को लाभ पहुचने के लिए आम नागरिक की कमर तोड़ कर भी श्रम म्ह्सुश नहीं करती ,शेखी ब्गारती हैं |
Monday, February 22, 2010
हुई जो गलतियाँ हमसे हम मिलकर सुधारेंगे
सियासत ने बिखेरे कांटे उसे मिलकर बुहारेंगे
कोमी एकता की जरूरत हैं अब पुरे मुल्क को
वतन की दे देके दुहाई दिल से हम पुकारेंगे
नही देखेंगे जो बुरे एक दूजे की मेरे भाई
वतन के वास्ते हम अच्छाई को निहारेंगे
कोई मजहब नही बढकर वतन के वाशिंदों सुनलो
वतन पे मरनेवालों को तहे दिल से सराहेंगे
जो करे बात नफरत की मुल्क उसको न ब्क्षेगा
मुह्हबत का जो देगा पैगाम आरती उसकी उतारेंगे
यहाँ की रोटियां खाकर यही के गीत गायेगें
वतन पे जान देकर के वतन अपना स्वारेंगें
सियासत ने बिखेरे कांटे उसे मिलकर बुहारेंगे
कोमी एकता की जरूरत हैं अब पुरे मुल्क को
वतन की दे देके दुहाई दिल से हम पुकारेंगे
नही देखेंगे जो बुरे एक दूजे की मेरे भाई
वतन के वास्ते हम अच्छाई को निहारेंगे
कोई मजहब नही बढकर वतन के वाशिंदों सुनलो
वतन पे मरनेवालों को तहे दिल से सराहेंगे
जो करे बात नफरत की मुल्क उसको न ब्क्षेगा
मुह्हबत का जो देगा पैगाम आरती उसकी उतारेंगे
यहाँ की रोटियां खाकर यही के गीत गायेगें
वतन पे जान देकर के वतन अपना स्वारेंगें
Saturday, February 20, 2010
जिन्दगी को मैने कई रंगों में देखा है ---उसीको मैने अपने लफ्जों में समेटा हैं ---
गजल
वेसे जिनगी में दिल मैं हर सक्ष का दर्जा हैं
जो हमको अच्छा लगता हैं उसीकी याद आती हैं
मोतऔर जिन्दगी की जंग में आदम परेशान हैं
कोई जब अपना जाता हैं रूह आंसू बहाती हैं|
i
दोस्ती रंग बदलती हैं दुश्मनी तब समज आती
दुश्मनी हो जाये जिससे दोस्ती याद आती हैं
गेरों के जख्मों की फेहरिश्त हैं यहाँ लम्बी
जख्म जब अपना देता है जिन्दगी तब सताती हैं
भाई तो भाई हैंमेरे घर आता जाता हैं
मेरा घर जन्नत होता हैं बहन जब घर आती हैं
आखिरे वक्त में बर्षों का bichada जब mil जाये
jindhgi rudan krti हैं मोत तब muskurati हैं
गजल
वेसे जिनगी में दिल मैं हर सक्ष का दर्जा हैं
जो हमको अच्छा लगता हैं उसीकी याद आती हैं
मोतऔर जिन्दगी की जंग में आदम परेशान हैं
कोई जब अपना जाता हैं रूह आंसू बहाती हैं|
i
दोस्ती रंग बदलती हैं दुश्मनी तब समज आती
दुश्मनी हो जाये जिससे दोस्ती याद आती हैं
गेरों के जख्मों की फेहरिश्त हैं यहाँ लम्बी
जख्म जब अपना देता है जिन्दगी तब सताती हैं
भाई तो भाई हैंमेरे घर आता जाता हैं
मेरा घर जन्नत होता हैं बहन जब घर आती हैं
आखिरे वक्त में बर्षों का bichada जब mil जाये
jindhgi rudan krti हैं मोत तब muskurati हैं
Thursday, February 18, 2010
भारत देश की वेदना को मैने अपनी गजल में ढाला हैं ------------------
गजल
अभी जींदा है मेरा मुल्क इसे ललकार ना दुशमन
यहाँ झूलो में माताये देश भक्ति सिखाती हैं
हिंद के ढूध की ताकत को ना अजमाना तू
यहाँ बेवा शहीदों की खुद अर्थी उठाती हैं
खेल ही खेल में सबक हमने सिखाया था
अभी भी खोफ से माताएं बच्चो को सुलाती हैं
नादानी सरहदों की तुजे बर्बाद न करदें
हमारे शेरों को दिल्ही हर रोज मनाती हैं
तेरी इन हरकतों से,पाक लगने लगा हैं अब
गाँव की और आताहै सियार की म़ोत बुलाती हैं
गजल
अभी जींदा है मेरा मुल्क इसे ललकार ना दुशमन
यहाँ झूलो में माताये देश भक्ति सिखाती हैं
हिंद के ढूध की ताकत को ना अजमाना तू
यहाँ बेवा शहीदों की खुद अर्थी उठाती हैं
खेल ही खेल में सबक हमने सिखाया था
अभी भी खोफ से माताएं बच्चो को सुलाती हैं
नादानी सरहदों की तुजे बर्बाद न करदें
हमारे शेरों को दिल्ही हर रोज मनाती हैं
तेरी इन हरकतों से,पाक लगने लगा हैं अब
गाँव की और आताहै सियार की म़ोत बुलाती हैं
Wednesday, February 10, 2010
अँधेरे नफरतों के दूर करने है यहाँ मिलके
कोमी एकता का उजाला फिर से लाना हैं |
वतन पे जान देने का नया जज्बा हो फिर पैदा
महोबत हो जिसका मजहब वटव एस्सा बनाना हैं
बनी जो दूरिय हममें हमे मिलके मितानी हैं
देके खून भी अपना चमन अपना सजना हैं
नफरत से कहाँ कोई पंहुचा हैं मुहोबत तक
महोबत में ही जीना हैं महोबत को ही गाना हैं
जख्मो को कुरेदो गे तो हासिल कुछ नही होगा
सियासत जख्म देती है मजहब तो बहाना हैं
सूबों के न हो जगड़े न जुबानो पे सियासत हो
ये सारा मुल्क अपना हैं यही जज्बा जगाना हैं
दर्दे मुल्क को मैने लफ्जों में समेत हैं
वक्त रहते मेरे भाई नफरत को भुलाना हैं
वतन से कोई नही बढकर यही पैगाम हैं मेरा
पहले खुद समज के ओरो को संजना हैं
कोमी एकता का उजाला फिर से लाना हैं |
वतन पे जान देने का नया जज्बा हो फिर पैदा
महोबत हो जिसका मजहब वटव एस्सा बनाना हैं
बनी जो दूरिय हममें हमे मिलके मितानी हैं
देके खून भी अपना चमन अपना सजना हैं
नफरत से कहाँ कोई पंहुचा हैं मुहोबत तक
महोबत में ही जीना हैं महोबत को ही गाना हैं
जख्मो को कुरेदो गे तो हासिल कुछ नही होगा
सियासत जख्म देती है मजहब तो बहाना हैं
सूबों के न हो जगड़े न जुबानो पे सियासत हो
ये सारा मुल्क अपना हैं यही जज्बा जगाना हैं
दर्दे मुल्क को मैने लफ्जों में समेत हैं
वक्त रहते मेरे भाई नफरत को भुलाना हैं
वतन से कोई नही बढकर यही पैगाम हैं मेरा
पहले खुद समज के ओरो को संजना हैं
Sunday, January 31, 2010
Rastriya Ekta Sena
मेरे प्यारे भारत वासियों,
सादर वंदेमातरम|
आप जानतें हैं की आज कुछ संकीरण सोचवाले प्रांतवाद की बातें कर के हमारी राष्ट्रीयता को खंडित करना चाहतें हैं | भारत सरकार ऐसे प्रन्त्वादियों को राष्ट्रीय एकता को तोड़ने का प्रयास करनेवाले देश द्रोहियों को सबक क्यों नही सिखाती ?आज महाराष्ट्र के लोगों में भारतीयता डीएम तोड़ रही हैं उसकेलिए जिम्मेदार हैं वे लोग जो महाराष्ट्र को भारत से बड़ा मानते हैं ,मनवाने का निक्रश्त्तं प्रयाश कर रहें हैं | भारतीयता का मजाक उडाया जा रहा हैं |राष्ट्र भाषा का विरोध किया जा रहा हैं |आप हम क्यों चुप हैं मेरी समज में नही आता |
प्रान्त्वादियो को सजा मिलनी चाहिए |
कोई तो इस मर्ज की दवा होनी चाहिए
सादर वंदेमातरम|
आप जानतें हैं की आज कुछ संकीरण सोचवाले प्रांतवाद की बातें कर के हमारी राष्ट्रीयता को खंडित करना चाहतें हैं | भारत सरकार ऐसे प्रन्त्वादियों को राष्ट्रीय एकता को तोड़ने का प्रयास करनेवाले देश द्रोहियों को सबक क्यों नही सिखाती ?आज महाराष्ट्र के लोगों में भारतीयता डीएम तोड़ रही हैं उसकेलिए जिम्मेदार हैं वे लोग जो महाराष्ट्र को भारत से बड़ा मानते हैं ,मनवाने का निक्रश्त्तं प्रयाश कर रहें हैं | भारतीयता का मजाक उडाया जा रहा हैं |राष्ट्र भाषा का विरोध किया जा रहा हैं |आप हम क्यों चुप हैं मेरी समज में नही आता |
प्रान्त्वादियो को सजा मिलनी चाहिए |
कोई तो इस मर्ज की दवा होनी चाहिए
Friday, January 29, 2010
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