मेरे अपने आत्मीय जनों ,आपके भीतर बेठेहुये परमात्मा को में बड़े आदर के साथ नमन करता हूँ |आप मेरे कार्य के बारे में भली भांति जानते हैं -----अभी गेरत को मैने तो रखा नही गिरवी
न सिर झुकाता हूँ ना तलवे चाटताहूँ मैं
मुह्हबत का देके पैगाम चला जाऊंगा मैं
नफरत ने बनाई दुरिया को पाटता हूँ मैं
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