सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
योग गुरु स्वामी रामदेव जी ने भारतीय लोकतंत्र कि कार्य प्रणाली से दुखी होकर के भारतीय व्यवसथा में परिवर्तन का बिगुल फूंक दीया है |एक संत ने भारतीय व्यवसथा में बदलाव के लिए योग के माध्यम से जो क्रांति लाई वह तो अतुलनीय हैं ही परन्तु अब बाबा जी ने भारतीय व्यवस्थाओं के दलालों को नेस्ताबुत करने कि ठान ली हैं |भारतीय प्रजा में विश्वाश का संचार हो रहा हैं |अभी तो मात्र स्वामी जी ने राजनीति में आने कि घोषणा कि हैं इतने में ही लोगो कि नींद हराम होने लगी हैं |अभी तो तीन साल पड़ें हैं लोक सभा के चुनावों में आज से ही भ्रश्ताच्रियाओं कि हालत पतली हो रही हैं |वाह रे संत तेरी वाणी का प्रभाव |वाह रे संत रर देश प्रेम |आज जहाँ दुसरे संत अपनी मुक्ति के लिए क्रमरहित होकर ब्रह्म कि चर्चाओं में लगें हैं वहीं एक संत राष्ट्र कि मुक्ति के लए अपना जीवन दांव पर लगा रहा हैं |
मैं तो स्वामी जी के देश प्रेम का कायल हूँ |एसा लगता हैं जेसे मेरा ही सोचाहुआ कार्य पूरा होने जा रहा हैं \मैं तो इस्वर का आभारी हनु कि मुझे भारत मैं सेवा को सुअवसर दीया |
जय हिंद
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