Tuesday, March 9, 2010

मेरे अपने आत्मीय बंधुओं ,आप के भीतर बेठे उस परम तत्व को प्रणाम करता हूँ जो प्रतिपल हमारे ह्रदय मेंधड़कन बनकर अपने होने का अहसास करता हैं |
                                      आप तो जानते ही हैं की परमात्मा ने मुझे जो जिम्मेदारी सोपी हैं उसे में अपने सामर्यथ्य के अनुसार निभाने का प्रयत्न करता हूँ मैं नही जनता कि मेरे कर्मों से इस देश की युवा पीड़ी में कितनी देश भक्ति  का में संचार कर पाऊंगा |इतना जरुर जनता हूँ किमेरे द्वारा जो भी काम देश सेवा के रूप में किया जा रहा हैं वह परमात्मा की  ही इच्छा हैं में तो मात्र एक माध्यम हूँ  \आज फिर इश्वर की कृपा से मैने नया लिखा हैं आप तक इसे पहुचाकर में अपने आप को धन्यता महसूस कर रहा हूँ ---1--संत के दर्शन से भाई बुरे कर्मों का होता नाश
                    संत के साथ रहने से मोक्ष का भाव सुहाता हैं |  
                          उसी को संत कहता हूँ जिसने ज्ञान हैं पाया ,
                         जिसका स्मरण करने से इश्वर का नाम आता हैं  |  
                2   सन्त  का जीवन त्यागमय दर्शन मोक्ष्मय  जिसका
                     नही जिसको कोई मोह सच्चा संत कहाता हैं
                    नही खोले जो आश्रम फसे जो ना विवादों में
                    एसा संत सदियों में कोई विरला ही आता हैं |
             ३     आश्रम खोल कर भोगी नया संसार रचातें  हैं 
                    धर्म के नाम पर कीड़े अधर्म के गीत गातें हैं |
                     यहाँ कोई नही जो रोकले ऐसे शेतानो को
                     ऐसे शेतान  मेरे देश में बड़े संत कहाते हैं |
                    
   

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