जिन्दगी को मैने कई रंगों में देखा है ---उसीको मैने अपने लफ्जों में समेटा हैं ---
गजल
वेसे जिनगी में दिल मैं हर सक्ष का दर्जा हैं
जो हमको अच्छा लगता हैं उसीकी याद आती हैं
मोतऔर जिन्दगी की जंग में आदम परेशान हैं
कोई जब अपना जाता हैं रूह आंसू बहाती हैं|
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दोस्ती रंग बदलती हैं दुश्मनी तब समज आती
दुश्मनी हो जाये जिससे दोस्ती याद आती हैं
गेरों के जख्मों की फेहरिश्त हैं यहाँ लम्बी
जख्म जब अपना देता है जिन्दगी तब सताती हैं
भाई तो भाई हैंमेरे घर आता जाता हैं
मेरा घर जन्नत होता हैं बहन जब घर आती हैं
आखिरे वक्त में बर्षों का bichada जब mil जाये
jindhgi rudan krti हैं मोत तब muskurati हैं
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