Sunday, March 7, 2010

सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम  |
                                  भारतीय समाज में आदिकाल से संतों और महात्माओं केप्रति बड़ा ही सम्मान का भाव रहा हैं |शास्त्रों के मतानुसार यह कलियुग चलरहा हैं भारतीय समाज सतयुग की तरह ही आज भी संतो -महंतों में आस्था रखता हैंपरन्तु कलियुग के प्रभाव से संतों और महंतो में भी कुछ विकार आने स्वाभविक हैं |मेरी समज में यह नही आता की कोई व्यक्ति संतो के पास क्यों जाता हैं ?क्या संत हमे मुक्ति दिलाने का मात्र एक विकल्प हैं यह्मे विकल्पों का पता नही हैं | आज जो कुछ भी सादु, संत ,स्वामी कर रहें हैं इन सभी को समाज ने इतनीऊँचाइयाँ देदी है की हम लाचारी महसूस करने लगें हैं |सेक्स के मामले जितने भारतीय संतों के हमारे सामने आया रहें हैं यह वास्तव में समाज की ही दुर्दशा को प्रकट परता हैं | संत हमारे समाज का दर्पण हैं इसी से हम अंदाजा लगा सकतें हैं की हम केसे समाज में रहतें हैं |धर्म के नाम पर आज क्या नही चलता ?इतना कुछ होने के बावजूद हमारे समाज के कुछ लोग आज भी पंडालो के चक्कर काटें हैं,क्यों ?
                                                              कोई तो हो जो इन  पर रोक लगाये

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