भारत देश की वेदना को मैने अपनी गजल में ढाला हैं ------------------
गजल
अभी जींदा है मेरा मुल्क इसे ललकार ना दुशमन
यहाँ झूलो में माताये देश भक्ति सिखाती हैं
हिंद के ढूध की ताकत को ना अजमाना तू
यहाँ बेवा शहीदों की खुद अर्थी उठाती हैं
खेल ही खेल में सबक हमने सिखाया था
अभी भी खोफ से माताएं बच्चो को सुलाती हैं
नादानी सरहदों की तुजे बर्बाद न करदें
हमारे शेरों को दिल्ही हर रोज मनाती हैं
तेरी इन हरकतों से,पाक लगने लगा हैं अब
गाँव की और आताहै सियार की म़ोत बुलाती हैं
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