सम्माननीय बंधुओं ,सादर वन्देमातरम |
भारतीय लोकतंत्र में कुछ गलत लोगों के प्रवेश करने के कारण कुछ विकार आया गये हैं जिसे दूर करने के लिए यह जरूरी है की नये सिरे से ,नए तरीके से नए लगों के साथ नई सोच को लेकर भारत मैं काम करने की जरूरत को आज जब सारा देश म्ह्सुश कर रहा हैं ऐसे में एक भारतीय साधू ने ठीक वेसे ही अपनी कमर कसली हैं जेसे स्वामी दयानंद स्वर्स्व्सती ने अज्ञान के खिलाफ ,कुरीतियों के खिलाफ अंधविश्वासों के खिलाफ जो जाग्रति अभियान चलाया था ठीक उसी अंदाज में स्वामी रामदेव जी ने हमारी मातृभूमि के उद्दार का सैट संकल्प लिय हैं मुझे इस कार्य में इसलिए जुड़ना अच्छा लगता हैं क्यों की मुझे एसा लगता हैं की जेसे जो जो मैने २५ वर्षों में देश के उत्थान के बारे में सोचा था अब पूरा होने का वक्त आया गया हैं --------------
गजल
सत्ता के बदलने से तो अब तक मात्र चहरेबदलें हैं
ववस्था के बदलने से ही मुल्क की काया पलटती हैं
व्वयस्था का लक्ष्य हो सिर्फ राष्ट्र का उत्थान
कोई कसले जो कमर देश की वयवस्था बदलती हैं
प्रजा खुद चाहती हैं देश निक्कमें नाबूत हो जाएँ
अब तो करना है आव्हान प्रजा मोका तरसती हैं
उठा है एक सन्यासी लिए चेतन्य शाश्वत का
नत्मश्तक होने को व्यवश्था अब मचलती हैं
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