प्यारे भारत प्रिय बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
आज मैने अख़बार में पढ़ा स्वामी रामदेव जी आगामी लोक सभा में भारत स्वाभिमान के लोगो को चुनावों में उतारेंगें| पढ़ कर अच्छा लगा ,एक संत देश की वय्वश्था में शिष्टाचार लाने की कोशिश कर रहा हैं | भारतीय राजनीती में संतों के आगमन के उदाहरण से अब तक कोई ज्यादा परिवर्तन नजर नही आया |संत समर्पित लोगों का भी हश्र अच्छा नही देखा |भारतीय प्रजा का संतों का जो मोक्ष लक्षी रूप हैं उस छवि के आलावा किसी भी रूप में संत क्यों न आजाये उसे नकार दीया जाता हैं |
आज भारत के कण कण जहाँ भर्ष्टाचार दीमक की तरह फेल चूका हैं वहाँ भारत की राजनीती में परिवर्तन लाना ,ईमानदारी से चुनाव लड़ना ,भारतीय चुनावी आचार सहिंता का अक्षरस पालन करते हुए बिना नोट बांटें ,बिना शराब बांटें ,केसे कोई चुनाव जित सकेगा ? नेतिकता की बातें करना अति आसन हैं परन्तु नेतिकता को जीना बड़ा ही मुश्किल काम होता हैं \भारत ने नीतियाँ बुरी हैं यह कहनेवाले आधे भारतीय हैं परन्तु हल देनेवाले कम हैं |भारतीय मतदाता बहुत ही समजदार हैं अब उसे अपना लाभ देखना आया गया हैं |उसे न तो भाषण लुभा सकतें हैं ना ही संस्कारित बातें |
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