सम्माननीय भारत प्रेमी बंधुओं ,
सादर वन्देमातरम |
भारतीय मानस पटल पर आजादी के पूर्व में जो भी निर्मम घटनाएँ हमारे देश के बंटवारे को लेकर घटी वे आज भी हमारे देश की आज की प्रजा को भी चेन से नही रहने देती | मेरा विचार है की जिस देश की नै पीढ़ी अपने हिंसक अतीत कोयाद रखती हैं वः वर्तमान में तरक्की के सुनहरे दिन नही देख पति इसलिए हर भारतीय को अपने देश को ही सर्वोपरी माननाचाहिए |आज यदि भारत की नै नस्ल तरक्की क्र रही हैं तो उसका सारा का सारा शरेय भारतीय समाज की विचारधारा को जाता हैं |हमारे देश के नोजवान नै उड़ने भर रहे हैं वहीं पकिश्थान की नै नस्ल हथियारों को ही अपना भविष्य मानने लगी हैं |
कोम की गद्दारी किसी भी मुल्क को तोड़ देती हैं
नफरत मुल्क के ख्वाबों का खून निचोड़ देती हैं
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