जय हिन्द
Thursday, July 9, 2015
Tuesday, September 21, 2010
des
देश को डराया ज रहा हैं कि एक बार फिर अयोध्या का निर्णय देश कि एकता को तोड़ने कि कोशिश कर सकता हैं -----मेरा तो मन्ना हैं कि -------
सुबो के न हो जगड़े न मजहब पर सियासत हो
ये पूरा मुल्क हैं अपना यही जज्बा जगाना हैं |
जख्मो को कुरेदोगे तो हासिल कुछ नही होगा
मुह्ह्बस्त में ही जीना हैं मुहब्बत को ही गाना हैं |
राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद
कोमी एकता हो आबाद वर्ना होंगे हम बर्बाद
सुबो के न हो जगड़े न मजहब पर सियासत हो
ये पूरा मुल्क हैं अपना यही जज्बा जगाना हैं |
जख्मो को कुरेदोगे तो हासिल कुछ नही होगा
मुह्ह्बस्त में ही जीना हैं मुहब्बत को ही गाना हैं |
राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद साम्प्रदायिकता मुर्दाबाद
कोमी एकता हो आबाद वर्ना होंगे हम बर्बाद
Tuesday, May 11, 2010
सम्माननीय बंधु जी ,सादर वन्देमातरम |
आप सभी जानते हैं कि बाब भी देश में किसी तरह के बदलाव कि बात कि जाति हैं तो सबसे पहले हमारा ध्यान देश के योवन पर जाकर केन्द्रित होता हैं |भारत में एक वर्ग एसा हैं जो देश में सम्पुरण रूप से बदलाव कहते हैं जेसे शहीदेआजम भगत सिंह जी ने सम्पुरण स्वराज की बात कही थी| क्या देश को पूर्ण स्वराज मिला ? क्या आज का भारत शहीदों के सपनों का भारत हैं ? क्या शहीदों की आत्माए देश की निक्कमी व्यवसथा को चलरहे नेताओं को कभी माफ़ कर पायेगी ? में तो मान कर चलता हूँ कि---------------------
परवान चढ़ रहा हैं योवन आज मेरे देश का |
आएगा मेरे मुल्क में अब बदलाव आएगा ||
फेलाई हुई ये नफरतें बदलेगी मुहब्बत में |
देश वासियों में फिर भाई सद्भाव आएगा ||
कहीं नही हैं हिन्दू मुसल्मा सीख में कोई बेर |
हम सभी हैं बस भारतीय यह भाव आएगा ||
बह जायेगी कमजोरिया बुराइयाँ अपने देश की|
जल्द मेरे मुल्क में एक एसा बहाव आएगा ||
सता की आँखों में न हो भेद हिन्दू मुसल्मा में |
सता की आँख में एसा सद्भाव आयेगा ||
न टूटेंगे कभी मंदिर न ढहेगी फिर कहीं मस्जिदे |
देश में समझ का एसा रख रखाव जरुर आएगा ||
जात हिंद
आप सभी जानते हैं कि बाब भी देश में किसी तरह के बदलाव कि बात कि जाति हैं तो सबसे पहले हमारा ध्यान देश के योवन पर जाकर केन्द्रित होता हैं |भारत में एक वर्ग एसा हैं जो देश में सम्पुरण रूप से बदलाव कहते हैं जेसे शहीदेआजम भगत सिंह जी ने सम्पुरण स्वराज की बात कही थी| क्या देश को पूर्ण स्वराज मिला ? क्या आज का भारत शहीदों के सपनों का भारत हैं ? क्या शहीदों की आत्माए देश की निक्कमी व्यवसथा को चलरहे नेताओं को कभी माफ़ कर पायेगी ? में तो मान कर चलता हूँ कि---------------------
परवान चढ़ रहा हैं योवन आज मेरे देश का |
आएगा मेरे मुल्क में अब बदलाव आएगा ||
फेलाई हुई ये नफरतें बदलेगी मुहब्बत में |
देश वासियों में फिर भाई सद्भाव आएगा ||
कहीं नही हैं हिन्दू मुसल्मा सीख में कोई बेर |
हम सभी हैं बस भारतीय यह भाव आएगा ||
बह जायेगी कमजोरिया बुराइयाँ अपने देश की|
जल्द मेरे मुल्क में एक एसा बहाव आएगा ||
सता की आँखों में न हो भेद हिन्दू मुसल्मा में |
सता की आँख में एसा सद्भाव आयेगा ||
न टूटेंगे कभी मंदिर न ढहेगी फिर कहीं मस्जिदे |
देश में समझ का एसा रख रखाव जरुर आएगा ||
जात हिंद
Thursday, May 6, 2010
क्रूरतम कसाब को एक बार नही १५० बार फासी की सजा होनी चाहिए -----डॉ प्रेमदान भारतीय
आयांक्वाद एक अराष्ट्रीय कुकृत्य हैं भारत की सहिष्ण संकृति को कमजोर माननेवाली आतंकवादी सोच को करार जटका लगा हैं |कसब के साथ अफजल गुरु को भी फांसी पर लटका देना चाहिए |देश के नागरिकों को पागलों की तरह गोलियों से भूनने वाले कसाब जैसे आतंकवादियों को किसी तरह की दया की भीख देने का अधिकार ही नही होना चाहिए |अफजल भी इसी तरह बचाहुआ हैं अब कसब भी कलको यदि राष्ट्रपति महोदय जी से दया की भीख मांगे तो न जाने कितना समय और निकल जायेगा |
आयांक्वाद एक अराष्ट्रीय कुकृत्य हैं भारत की सहिष्ण संकृति को कमजोर माननेवाली आतंकवादी सोच को करार जटका लगा हैं |कसब के साथ अफजल गुरु को भी फांसी पर लटका देना चाहिए |देश के नागरिकों को पागलों की तरह गोलियों से भूनने वाले कसाब जैसे आतंकवादियों को किसी तरह की दया की भीख देने का अधिकार ही नही होना चाहिए |अफजल भी इसी तरह बचाहुआ हैं अब कसब भी कलको यदि राष्ट्रपति महोदय जी से दया की भीख मांगे तो न जाने कितना समय और निकल जायेगा |
Thursday, April 8, 2010
सम्माननीय बंधुओं ,सादर वन्देमातरम |
भारतीय लोकतंत्र में कुछ गलत लोगों के प्रवेश करने के कारण कुछ विकार आया गये हैं जिसे दूर करने के लिए यह जरूरी है की नये सिरे से ,नए तरीके से नए लगों के साथ नई सोच को लेकर भारत मैं काम करने की जरूरत को आज जब सारा देश म्ह्सुश कर रहा हैं ऐसे में एक भारतीय साधू ने ठीक वेसे ही अपनी कमर कसली हैं जेसे स्वामी दयानंद स्वर्स्व्सती ने अज्ञान के खिलाफ ,कुरीतियों के खिलाफ अंधविश्वासों के खिलाफ जो जाग्रति अभियान चलाया था ठीक उसी अंदाज में स्वामी रामदेव जी ने हमारी मातृभूमि के उद्दार का सैट संकल्प लिय हैं मुझे इस कार्य में इसलिए जुड़ना अच्छा लगता हैं क्यों की मुझे एसा लगता हैं की जेसे जो जो मैने २५ वर्षों में देश के उत्थान के बारे में सोचा था अब पूरा होने का वक्त आया गया हैं --------------
गजल
सत्ता के बदलने से तो अब तक मात्र चहरेबदलें हैं
ववस्था के बदलने से ही मुल्क की काया पलटती हैं
व्वयस्था का लक्ष्य हो सिर्फ राष्ट्र का उत्थान
कोई कसले जो कमर देश की वयवस्था बदलती हैं
प्रजा खुद चाहती हैं देश निक्कमें नाबूत हो जाएँ
अब तो करना है आव्हान प्रजा मोका तरसती हैं
उठा है एक सन्यासी लिए चेतन्य शाश्वत का
नत्मश्तक होने को व्यवश्था अब मचलती हैं
भारतीय लोकतंत्र में कुछ गलत लोगों के प्रवेश करने के कारण कुछ विकार आया गये हैं जिसे दूर करने के लिए यह जरूरी है की नये सिरे से ,नए तरीके से नए लगों के साथ नई सोच को लेकर भारत मैं काम करने की जरूरत को आज जब सारा देश म्ह्सुश कर रहा हैं ऐसे में एक भारतीय साधू ने ठीक वेसे ही अपनी कमर कसली हैं जेसे स्वामी दयानंद स्वर्स्व्सती ने अज्ञान के खिलाफ ,कुरीतियों के खिलाफ अंधविश्वासों के खिलाफ जो जाग्रति अभियान चलाया था ठीक उसी अंदाज में स्वामी रामदेव जी ने हमारी मातृभूमि के उद्दार का सैट संकल्प लिय हैं मुझे इस कार्य में इसलिए जुड़ना अच्छा लगता हैं क्यों की मुझे एसा लगता हैं की जेसे जो जो मैने २५ वर्षों में देश के उत्थान के बारे में सोचा था अब पूरा होने का वक्त आया गया हैं --------------
गजल
सत्ता के बदलने से तो अब तक मात्र चहरेबदलें हैं
ववस्था के बदलने से ही मुल्क की काया पलटती हैं
व्वयस्था का लक्ष्य हो सिर्फ राष्ट्र का उत्थान
कोई कसले जो कमर देश की वयवस्था बदलती हैं
प्रजा खुद चाहती हैं देश निक्कमें नाबूत हो जाएँ
अब तो करना है आव्हान प्रजा मोका तरसती हैं
उठा है एक सन्यासी लिए चेतन्य शाश्वत का
नत्मश्तक होने को व्यवश्था अब मचलती हैं
Tuesday, April 6, 2010
सम्माननीय बंधुओं ,सादर वन्देमातरम |
भारतीय लोकतंत्र के लिए आजादी के बाद का सबसे कमजोर और गलतियों भरा दिनथा ६ अप्रेल का दिन नक्सलवाद को अंकुश मैं लाने के लिए केंद्र सरकार के प्रयत्न तो जारी ही है बावजूद इसके हम नक्षलवादियों को मुह तोड़ जवाब क्यों नही दे पा रहें हैं ? क्या अब भारतीय सेना को लोकल उग्रवाद से रूबरू नही होना चाहिए |
दतावादा मैं शहीद हुये७६ भारतीय जवानो की शहीदी व्यर्थ ना जाये इसका हर भारतीय को अपनेदेश में फ़ैल रहे इन राष्ट्रद्रोही ताकतों वाले लोगो को सरकार के साथ मिलकर हमें प्रयत्न करने चाहिय|
७६ जवानों कीशहीदी कोसलाम देतेहुये ---श्रदांजली |
जय राष्ट्रवाद
भारतीय लोकतंत्र के लिए आजादी के बाद का सबसे कमजोर और गलतियों भरा दिनथा ६ अप्रेल का दिन नक्सलवाद को अंकुश मैं लाने के लिए केंद्र सरकार के प्रयत्न तो जारी ही है बावजूद इसके हम नक्षलवादियों को मुह तोड़ जवाब क्यों नही दे पा रहें हैं ? क्या अब भारतीय सेना को लोकल उग्रवाद से रूबरू नही होना चाहिए |
दतावादा मैं शहीद हुये७६ भारतीय जवानो की शहीदी व्यर्थ ना जाये इसका हर भारतीय को अपनेदेश में फ़ैल रहे इन राष्ट्रद्रोही ताकतों वाले लोगो को सरकार के साथ मिलकर हमें प्रयत्न करने चाहिय|
७६ जवानों कीशहीदी कोसलाम देतेहुये ---श्रदांजली |
जय राष्ट्रवाद
Wednesday, March 31, 2010
सम्मानीय बंधुओं ,
्वंदेमात्र्म |
भारतीय समाज में चारों वर्णों से अलग एक वर्नातित देवजाति हैं चारण |आप जानते ही हैं की मुझे भी इस जाति में जन्म लेने का गोरव प्राप्त हुआ हैं जिस जाति ने सत्य को ही अपना हथियार बनाया और उसी सत्य के आधार पर इस जाति ने सम्राटों एवं सत्ता को खुली चुनोतियाँ भी दी |मैने भी अपनी देव जाति की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम सं १९८५ से ही कार्य शुरू कर दीया था ,आज पचीस वर्ष हो गये हैं में राष्ट्रीय एकता ,सांप्रदायिक सद्भाव ,भाईचारे ,कोमी एकता एवं समन्वयात्मक राजनीति को बढ़ावा देने का ही काम किया आज मुझे लगने लगा हैं की यदी में किसी अन्य जाति में जन्मा होता तो मैने कब का अपना लक्ष्य बदल दीया होता परन्तु मेरे रगों में दोड्नेवाले चारण ततव ने मुझे विचलित नही होने दीया एसा नहीं हैं की मुझे भी लालच नही दिए गये परन्तु भीतर तक धन के प्रति कोई गहरी लालसा थी ही नहीं इसीलिए में आज भी उसी लगाव से देश की एकता के लिए क्रम रत हूँ |
एसा चारण तत्वहैं क्या ? जब मैने गहराई से खुद केभीतर बहनेवाले विचारों को जाना तो मुझे मेरे प्रशन का जवाब मिल गया और में इस निष्कर्ष पर पहुचा की -------------------
चारण की चेतना को न कभी ललकारा मुगलों ने ,
अंग्रेजों को बारहठ केशरी सिंह ने ललकारा था |
हम चारण हैं हमारी चेतना का ैं न हैं कोई सानी ,
आजादी के सूरज को प्रताप सिंह ने निखारा था |
हमने ठान ली जब भी सत्ता के मोड़ डाले रुख ,
चारण चले थे अकेले ही देश ने जब पुकारा था |
हममें आज भी है कुव्वत जमाने को बदलने की ,
थी न सत्ता की समज जिनम हमने सवार था |
दुरसा आढ़ा बन्किदास गाडन केसोदास थे जींदा ,
केशरी सिंह अखा लखा जी वाह क्या नजर था \
कपूतों का न यश गाया किया वीरों को अम्र हमने ,
यूँ ही जागीरी नही मिली थी झूठों को नकारा था |
सत्ता को सच कहने का था शिर्फ़ होसला चारण में ,
प्रजा की वकालात करता प्रजा चारण सहारा था |
्वंदेमात्र्म |
भारतीय समाज में चारों वर्णों से अलग एक वर्नातित देवजाति हैं चारण |आप जानते ही हैं की मुझे भी इस जाति में जन्म लेने का गोरव प्राप्त हुआ हैं जिस जाति ने सत्य को ही अपना हथियार बनाया और उसी सत्य के आधार पर इस जाति ने सम्राटों एवं सत्ता को खुली चुनोतियाँ भी दी |मैने भी अपनी देव जाति की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम सं १९८५ से ही कार्य शुरू कर दीया था ,आज पचीस वर्ष हो गये हैं में राष्ट्रीय एकता ,सांप्रदायिक सद्भाव ,भाईचारे ,कोमी एकता एवं समन्वयात्मक राजनीति को बढ़ावा देने का ही काम किया आज मुझे लगने लगा हैं की यदी में किसी अन्य जाति में जन्मा होता तो मैने कब का अपना लक्ष्य बदल दीया होता परन्तु मेरे रगों में दोड्नेवाले चारण ततव ने मुझे विचलित नही होने दीया एसा नहीं हैं की मुझे भी लालच नही दिए गये परन्तु भीतर तक धन के प्रति कोई गहरी लालसा थी ही नहीं इसीलिए में आज भी उसी लगाव से देश की एकता के लिए क्रम रत हूँ |
एसा चारण तत्वहैं क्या ? जब मैने गहराई से खुद केभीतर बहनेवाले विचारों को जाना तो मुझे मेरे प्रशन का जवाब मिल गया और में इस निष्कर्ष पर पहुचा की -------------------
चारण की चेतना को न कभी ललकारा मुगलों ने ,
अंग्रेजों को बारहठ केशरी सिंह ने ललकारा था |
हम चारण हैं हमारी चेतना का ैं न हैं कोई सानी ,
आजादी के सूरज को प्रताप सिंह ने निखारा था |
हमने ठान ली जब भी सत्ता के मोड़ डाले रुख ,
चारण चले थे अकेले ही देश ने जब पुकारा था |
हममें आज भी है कुव्वत जमाने को बदलने की ,
थी न सत्ता की समज जिनम हमने सवार था |
दुरसा आढ़ा बन्किदास गाडन केसोदास थे जींदा ,
केशरी सिंह अखा लखा जी वाह क्या नजर था \
कपूतों का न यश गाया किया वीरों को अम्र हमने ,
यूँ ही जागीरी नही मिली थी झूठों को नकारा था |
सत्ता को सच कहने का था शिर्फ़ होसला चारण में ,
प्रजा की वकालात करता प्रजा चारण सहारा था |
Sunday, March 21, 2010
सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
योग गुरु स्वामी रामदेव जी ने भारतीय लोकतंत्र कि कार्य प्रणाली से दुखी होकर के भारतीय व्यवसथा में परिवर्तन का बिगुल फूंक दीया है |एक संत ने भारतीय व्यवसथा में बदलाव के लिए योग के माध्यम से जो क्रांति लाई वह तो अतुलनीय हैं ही परन्तु अब बाबा जी ने भारतीय व्यवस्थाओं के दलालों को नेस्ताबुत करने कि ठान ली हैं |भारतीय प्रजा में विश्वाश का संचार हो रहा हैं |अभी तो मात्र स्वामी जी ने राजनीति में आने कि घोषणा कि हैं इतने में ही लोगो कि नींद हराम होने लगी हैं |अभी तो तीन साल पड़ें हैं लोक सभा के चुनावों में आज से ही भ्रश्ताच्रियाओं कि हालत पतली हो रही हैं |वाह रे संत तेरी वाणी का प्रभाव |वाह रे संत रर देश प्रेम |आज जहाँ दुसरे संत अपनी मुक्ति के लिए क्रमरहित होकर ब्रह्म कि चर्चाओं में लगें हैं वहीं एक संत राष्ट्र कि मुक्ति के लए अपना जीवन दांव पर लगा रहा हैं |
मैं तो स्वामी जी के देश प्रेम का कायल हूँ |एसा लगता हैं जेसे मेरा ही सोचाहुआ कार्य पूरा होने जा रहा हैं \मैं तो इस्वर का आभारी हनु कि मुझे भारत मैं सेवा को सुअवसर दीया |
जय हिंद
सादर वन्देमातरम |
योग गुरु स्वामी रामदेव जी ने भारतीय लोकतंत्र कि कार्य प्रणाली से दुखी होकर के भारतीय व्यवसथा में परिवर्तन का बिगुल फूंक दीया है |एक संत ने भारतीय व्यवसथा में बदलाव के लिए योग के माध्यम से जो क्रांति लाई वह तो अतुलनीय हैं ही परन्तु अब बाबा जी ने भारतीय व्यवस्थाओं के दलालों को नेस्ताबुत करने कि ठान ली हैं |भारतीय प्रजा में विश्वाश का संचार हो रहा हैं |अभी तो मात्र स्वामी जी ने राजनीति में आने कि घोषणा कि हैं इतने में ही लोगो कि नींद हराम होने लगी हैं |अभी तो तीन साल पड़ें हैं लोक सभा के चुनावों में आज से ही भ्रश्ताच्रियाओं कि हालत पतली हो रही हैं |वाह रे संत तेरी वाणी का प्रभाव |वाह रे संत रर देश प्रेम |आज जहाँ दुसरे संत अपनी मुक्ति के लिए क्रमरहित होकर ब्रह्म कि चर्चाओं में लगें हैं वहीं एक संत राष्ट्र कि मुक्ति के लए अपना जीवन दांव पर लगा रहा हैं |
मैं तो स्वामी जी के देश प्रेम का कायल हूँ |एसा लगता हैं जेसे मेरा ही सोचाहुआ कार्य पूरा होने जा रहा हैं \मैं तो इस्वर का आभारी हनु कि मुझे भारत मैं सेवा को सुअवसर दीया |
जय हिंद
Monday, March 15, 2010
सम्माननीय बंधु ,
सादर वन्देमातरम |
जब भी में किसी कवी सम्मेलन में अपनी रचनाये पढ़ कर अन्यों को सुनकर घर आता हूँ तो मुझे इस बात का दुःख होता हैं कि साहित्य के नाम पर कुछ मसखरे अपनी फूहड़ता को कितनी शालीनता के साथ प्रस्तुत करके साहित्य को निर्ममता से हलाल कर देते हैं |अपने विचारों को कविता के नाम पर श्रोताओं के जहनपर थोप देतें हैं |ऐसे लोगो के लिए मैने लिखा हैं ---------------
मसखरी कविता में फर्क नही जनता ,
सठियाये समाज कि पहचान यही हैं |
फूहड़ता नोक जोंक साहित्य नही होता ,
शब्दों के दलालों कि शान यही हैं
सादर वन्देमातरम |
जब भी में किसी कवी सम्मेलन में अपनी रचनाये पढ़ कर अन्यों को सुनकर घर आता हूँ तो मुझे इस बात का दुःख होता हैं कि साहित्य के नाम पर कुछ मसखरे अपनी फूहड़ता को कितनी शालीनता के साथ प्रस्तुत करके साहित्य को निर्ममता से हलाल कर देते हैं |अपने विचारों को कविता के नाम पर श्रोताओं के जहनपर थोप देतें हैं |ऐसे लोगो के लिए मैने लिखा हैं ---------------
मसखरी कविता में फर्क नही जनता ,
सठियाये समाज कि पहचान यही हैं |
फूहड़ता नोक जोंक साहित्य नही होता ,
शब्दों के दलालों कि शान यही हैं
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